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22-08-2025-रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है

By Mani 3 min read

भारत पर क्यों गुस्सा निकाल रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप? इन आंकड़ों से समझ में आ जाएगा सारा खेल


रूस भारत को कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर है। लेकिन कुछ साल पहले तक ऐसा नहीं था। भारत की तेल सप्लाई में रूस की हिस्सेदारी बहुत कम थी। लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद स्थिति बदल गई है।


भारत के तेल बाजार में रूस की बढ़ती पकड़ ने ट्रेड के तौर-तरीकों को बदल दिया है

1.रूस भारत का सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है

2.भारत को तेल सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देशों इराक, सऊदी अरब और यूएई पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है

3.लेकिन अमेरिका को भारी नुकसान हुआ है

4. अमेरिका से भारत को होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई चार साल पहले की तुलना में एक तिहाई कम हो गई है 

5. आंकड़ों से पता चलता है कि छोटे सप्लायरों को भी नुकसान हुआ है


6.2021 से इराक और सऊदी अरब से तेल की सप्लाई में लगभग 5% की कमी आई है।

 

  2021 वह साल था जब यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था। इस दौरान यूएई से सप्लाई 3% बढ़ी है। इसके विपरीत छोटे सप्लायरों से होने वाली सप्लाई पर असर पड़ा है। अमेरिका से सप्लाई एक तिहाई कम हो गई है। नाइजीरिया और कुवैत से शिपमेंट आधे हो गए हैं। ओमान और मैक्सिको से शिपमेंट 80% से ज्यादा गिर गए हैं।

■  2021 में भारत का रोजाना तेल आयात 40 लाख बैरल था। इसमें रूस की हिस्सेदारी महज 100,000 बैरल थी। यह इराक, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका, नाइजीरिया, कुवैत और अन्य देशों से बहुत कम था। लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद स्थिति बदल गई। 

■  पश्चिमी देशों ने रूस के तेल कई तरह की पाबंदियां लगाईं। इसके बाद रूस ने भारत और चीन को डिस्काउंट पर तेल बेचना शुरू किया। 2022 तक इराक और सऊदी अरब के बाद रूस भारत का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया।

■  एक साल बाद रूस ने दोनों को पीछे छोड़ दिया। रूस से रोजाना सप्लाई 1.76 मिलियन बैरल पहुंच गई। यह सऊदी और इराक से होने वाली जॉइंट सप्लाई से भी ज्यादा था। 2025 में रूस अभी भी टॉप पर है। रूस रोजाना औसतन लगभग 1.7 मिलियन बैरल की सप्लाई कर रहा है। इसके बावजूद भारत के मिडिल ईस्ट के सप्लायर भी मजबूत बने हुए हैं।

■  2025 में इराक की रोजाना सप्लाई औसतन 898,000 बैरल, सऊदी अरब की 640,000 बैरल और यूएई की 448,000 बैरल रही है। 2021 की तुलना में इराक और सऊदी से वॉल्यूम में लगभग 5% की कमी आई है, जबकि यूएई से 3% की वृद्धि हुई है।

■  रूसी तेल ज्यादातर स्पॉट मार्केट में डिस्काउंट पर खरीदा जाता है। इससे अफ्रीका और अमेरिका से आने वाले महंगे कार्गो पर असर पड़ा है।

■  2025 में, अमेरिका की रोजाना सप्लाई औसतन 271,000 बैरल, नाइजीरिया की 151,000 बैरल, कुवैत की 131,000 बैरल, ओमान की 20,000 बैरल और मैक्सिको की 24,000 बैरल रही है। कोलंबिया, इक्वाडोर, गैबोन और कांगो से भी फ्लो कम हो गया है।


भारत ने रूस से तेल खरीदा तो सबसे अधिक आपत्ति अमेरिका को हुई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नहीं चाहते कि भारत रूस से तेल खरीदे. इसी वजह से भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील भी अटकी हुई है, जिसके चलते 27 अक्टूबर से भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की गई है.

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