इसान भी कितना अनोखा है | short Poem |Short Poetry
इसान भी कितना अनोखा है
इंसान भी कितना अनोखा है ! अनुकूलता में सिमट कर रह गया है
तराश और तलाश के घेरे में सीमित परिधि में भटक रहा है।
अनदेखे बाहर को अपना मान प्रतिकूलता में जकड़ता जा रहा है।
न अपनों का अपनापन मिल रहा है न ही प्रतिकूलता से जूझ पा रहा है।
छोटी इकाई से सामंजस्य बैठाने पर बाहरी बड़ी इकाई पर काबूपाया जा सकता है
विजयी होना है तो स्वयं से जूझो हारना है तो स्वयं से कभी नहीं।
Also Read This For Better Health ->Health tips | Benefits of pomegranate juice | अनार जूस पीने के 6 फायदे
उम्मीद है, आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी , अपने सुझाव हमें कमेंट के माध्यम से अवश्य बताएं और इसी तरह की कविता / पोस्ट पढ़ने के लिए LifeDb.in पर विजिट कीजिए |
धन्यवाद !
!! फॉलो करें !!
| Follow lifedb_official on insta | |
| Follow Lifedb_official page on facebook | |
| Follow lifedb_official on linkdin | |
| Follow lifedb on WhatsApp | |
| Subscribe Lifedb Youtube Channel On YouTube | |
| Follow lifedb on Pinterest | |
| Follow lifedb on Quora |
You may also like: स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई
Leave a Reply
Please log in to comment on this post.