National Festival of Tree Planting (Van Mahotsav) in India 2023
वन महोत्सव 2023 - शनिवार, जुलाई 01 से शुक्रवार, जुलाई 07

वन का महत्व
हमारे जीवन में जितना धन है उतने ही अहम वन है। वन इंसानों के सबसे सच्चे दोस्त की तरह रहे हैं। जिस दिन वन नहीं रहेंगे समझो हम भी नहीं रहेंगे। वन के बिना हमारा जीवन ही अधूरा है। वन इतने सुंदर होते हैं कि वह किसी का भी मन मोह लेने में सक्षम होते हैं। वन हमें शुद्ध हवा प्रदान करते हैं। यह शुद्ध हवा ऑक्सीजन कहलाती है। वन मनुष्यों को फल-फूल, लकड़ी, जड़ी बूटियां उपलब्ध करवाती है। अधिक वन होने से वातावरण सही बना रहता है। पारिस्थितिकी संतुलन सही रहता है। वन्यजीव भी जंगलों पर ही निर्भर होते हैं। इसलिए जब वन की संख्या अधिक होती है तो वन्यजीव भी सुरक्षित रहते हैं। अधिक संख्या में वन होने से बाढ़ जैसी मुश्किलों का सामना भी नहीं करना पड़ता।

क्यों मनाया जाता है वन महोत्सव
कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि वन महोत्सव क्यों मनाना चाहिए, आखिर इसकी क्या आवश्यकता है। आज हम आधुनिक बनने की होड़ में वनों की उपयोगिता को ही भूलते जा रहे हैं। बड़े-बड़े शहर, हाईवे, सड़क, यातायात, फैक्ट्रियां इत्यादि बनाने की चाहत में वनों को ही समाप्त करते जा रहे हैं। जिससे लाखों पशु-पक्षी विलुप्त होते जा रहे हैं। एक समय था जब सुबह की शुरुआत पक्षियों की चहचाहट के साथ होती थी। घर के आंगन में गौरेया दाना चुगने आया करती आती । लेकिन आज उन आवाजों की जगह ट्रैफिक के शोर-शराबों ने ले ली है। पेड़ों की कटाई के कारण बड़ी संख्या में पशु-पक्षी, कीट-पतंगे बेघर हो गए हैं। कुछ पशु-पक्षियों का तो नामों निशान भी खत्म हो गया है। पेड़ की ठंडी हवाओं की जगह आज गाड़ियों से निकलते धुओं ने ले ली है। पेड़ों की छांव की जगह फैक्ट्रियों के कूड़े-करकट ने ले ली है। आज हम स्वच्छ हवा में सांस लेने तक को तरस गए हैं। हम पेड़ों की ताजा ठंडी हवा लेने के लिए शहरों से छुट्टी लेकर गांवों, पहाड़ों की ओर रुख करते हैं लेकिन हमारी बढ़ती लालसा के कारण शहर के बाद अब गांव-पहाड़ भी वृक्षों के अभाव में जीने को मजबूर होते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता अमृता देवी बिश्नोई ने कहा था कि "यदि किसी पेड़ को किसी के सिर की बली देकर भी बचाया जाता है, तो बचाना चाहिए है।" आज भारत में वृक्षों के संरक्षण के लिए कई त्यौहार, उत्सव मनाए जाते हैं। लेकिन इसके बावजूद पेड़ों के लगातार काटे जाने से हमें कई नुकसान भी हो रहे हैं। जैसे बरसात के दिनों की घटती संख्या और वर्षा की घटनाओं की तीव्रता के पीछे पेड़ों को अत्याधिक मात्रा में काटे जाना है। भारत में लंबे समय से बाढ़, सूखा, गर्मी की लहरें, चक्रवात, और अन्य प्राकृतिक आपदाओं ने अपने पैर पसारे हुए हैं। कभी तेज गर्मी से लोग तिलमिलाने लगते हैं तो कभी अंधाधुंध बारिश से, कहीं सूखा पड़ रहा है तो कई ठंड का प्रकोप बढ़ रहा है। नदी, नाले सूखते जा रहें हैं। आए दिन प्राकृतिक आपदाएं अपनी जड़े जमा रही है। हाल ही में उतराखंड के केदारनाथ में आई बाढ़ हो जिसमें ना जाने कितने लोग बली चढ़ गए या फिर दिन पर दिन गर्मी की मार से तपते लोग हों इन सभी विपदाओं के पीछे पेड़ों की कटाई है। हम माने या ना माने लेकिन पेड़ों की कटाई से नुकसान हमें ही हो रहा है। वन नीति, 1988 के अनुसार भूमि के कुल क्षेत्रफल का 33 प्रतिशत भाग वन-आच्छादित होना चाहिए। तभी प्राकृतिक संतुलन रह सकेगा, किंतु सन 2001 के रिमोट सेंसिंग द्वारा एकत्रित किए गए आकड़ों के अनुसार देश का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग कि.मी. है। इनमें वन भाग 6,75,538 वर्ग कि.मी. है, जिससे वन आवरण मात्र 20 में प्रतिशत ही होता है और ये आंकड़े भी पुराने हैं। अब तो इनकी संख्या और कम गई है।वृक्ष लगाने के फायदे
जुलाई के पूरे सप्ताह सभी स्कूल-कॉलेज ने सड़को के किनारे, घरों के बाहर पेड़-पौधे लगाने का कार्य शुरु किया है। पेड़ों की आवश्यकता हमें क्यों हैं इस बात का उदहारण देश के तटीय क्षेत्रों में लगाए गए घने पेड़ों से है जिसने 2004 में आए सुनामी के विनाशकारी प्रभाव को कम करने में मदद की। उन्होंने आगामी लहरों को अवशोषित कर लिया और बड़ी संख्या में मानव निवासों को संरक्षित किया। वन महोत्सव का उद्देश्य ही यही है कि हम सभी लोग कम से कम एक पेड़ या पौधा लगाए ताकि आने वाली पीड़ियों को भी हम शुद्ध हवा दे सकें। वन महोत्सव के दौरान हर नागरिक से यही उम्मीद की जाती है कि वो कम से कम एक पौधा तो अवश्य लगाएं। इसके अलावा, पेड़ों के संरक्षण से लाभ और वृक्षों को काटने के कारण होने वाले नुकसान के बारे में जागरूकता अभियान आयोजित किए जाते हैं। बच्चों द्वारा भी कई ऐसे कार्यक्रम किए जाते है जिनमें वृक्षों के संरक्षण की बात कही गई हो। आज हम सभी को पेड़ों के प्रति जागरुक होने की आवश्यकता है। यह पेड़ हमसे कुछ लेते नहीं है बल्कि हमें एक नया जीवन देते हैं। पूरे देश में वन महोत्सव के जरिए विलुप्त हुए वनों को फिर से बनाए रखने के लिए वनीकरण अभियान शुरू किए गए हैं। मनुष्य के लालच ने आज वनों का एक बड़ा हिस्सा समाप्त कर दिया है। 'वन महोत्सव' का त्योहार पर्यावरण को बचाने के लिए एक सुंदर पहल है, जिसके लिए हमें बहुत कुछ करना चाहिए है। आमतौर पर, स्थानीय पेड़ लगाए जाते हैं क्योंकि वे आसानी से स्थानीय परिस्थितियों में अनुकूलित होते हैं, पर्यावरण प्रणालियों में एकीकृत होते हैं और ज्यादा समय तक जीवित रहने का दम रखते हैं। इसके अलावा, ऐसे पेड़ स्थानीय पक्षियों, कीड़ों और जानवरों को भी समर्थन देने में सहायक होते हैं। राज्य सरकारें और नागरिक निकाय स्कूलों, कॉलेजों और अकादमिक संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों के जरिए आज पेड़ों को एक बार फिर से बचाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में हमारा भी यह कर्तव्य बनता है कि हम भी वृक्षों को बचाने और लगाने के लिए अपनी-अपनी भूमिका अदा करें।‘जब धरती पर रहेंगे वन, तभी मिलेगा हमें स्वच्छ जीवन’
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