Life-Style

कविता मेरी डायरी से।

By Manishamukati 1 min read

बेगाने होते लोग देखें,अ

जनबी होता शहर देखा,

हर इंसान को यहां,

मैंने खुद से ही बेखबर देखा।


रोते हुए नयन देखें,

मुस्कुराता हुआ अधर देखा,

गैरों के हाथों में मरहम,

अपनों के हाथों में खंजर देखा।


मत पूछ इस जिंदगी में,

इन आंखों ने क्या मंजर देखा,

मैंने हर इंसान को यहां,

बस खुद से ही बेखबर देखा।

You may also like: The 48 Laws of Power अब हिदी में | शक्ति के 48 नियम | part -25

Likes 0 · Dislikes 0 Log in to like or dislike this post.
Share this post

Leave a Reply

Please log in to comment on this post.