Post Details

कविता मेरी डायरी से।

Manishamukati

Tue , Aug 22 2023

Manishamukati

बेगाने होते लोग देखें,अ

जनबी होता शहर देखा,

हर इंसान को यहां,

मैंने खुद से ही बेखबर देखा।


रोते हुए नयन देखें,

मुस्कुराता हुआ अधर देखा,

गैरों के हाथों में मरहम,

अपनों के हाथों में खंजर देखा।


मत पूछ इस जिंदगी में,

इन आंखों ने क्या मंजर देखा,

मैंने हर इंसान को यहां,

बस खुद से ही बेखबर देखा।

You may also like - Happy Majdur Divas 2024

Leave a Reply

Please log in to Comment On this post.